प्रजनन जाँच के अंतरराष्ट्रीय दिशानिर्देशों में 3D ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाउंड को क्यों अपनाया गया है।
WHO के 2025 के Guideline for the prevention, diagnosis and treatment of infertility में गर्भाशय गुहा के मूल्यांकन के लिए बिना चीर-फाड़ वाली जाँचों के क्रम में सलाइन इन्फ्यूज़न सोनोहिस्टेरोग्राफी (SIS) और त्रि-आयामी अल्ट्रासाउंड (3D US) को सबसे ऊपर रखा गया है। यह मुख्य रूप से लागत के आधार पर SIS को 3D US से पहले सुझाता है, और यह भी कहता है कि जहाँ 3D US पहले से उपलब्ध है, वहाँ 3D US पसंदीदा विकल्प हो सकता है। जहाँ संसाधन उपलब्ध हों, वहाँ यह द्वि-आयामी अल्ट्रासाउंड के बजाय 3D US का भी सुझाव देता है। ये दोनों सशर्त सिफ़ारिशें हैं, जो कम निश्चितता वाले प्रमाणों पर आधारित हैं। हिस्टेरोस्कोपी संदर्भ मानक बनी रहती है, लेकिन यह इनवेसिव है, इसलिए नियमित मूल्यांकन में इसका उपयोग नहीं होता।
स्रोत: WHO, Guideline for the prevention, diagnosis and treatment of infertility, Geneva, 2025
3D स्कैन कोरोनल तल को दर्ज करता है, जिससे गर्भाशय की बाहरी रूपरेखा और गुहा के आकार का सटीक मूल्यांकन हो पाता है। मुलेरियन असामान्यताओं और डिस्मॉर्फिक गर्भाशय की पहचान के लिए यह आवश्यक है, जो सामान्य 2D स्कैन में अक्सर छूट जाते हैं।
गुहा के आकार से जुड़ी समस्याओं का सटीक निदान उपचार को बदल देता है: इससे हिस्टेरोस्कोपिक सुधार की दिशा तय हो सकती है, भ्रूण स्थानांतरण की योजना बदल सकती है, या पिछली इम्प्लांटेशन विफलताओं और गर्भपातों की व्याख्या मिल सकती है।
LIFE by Dr. Pat में संपूर्ण बांझपन जाँच के हिस्से के रूप में हम नियमित रूप से 3D-TVUS की सुविधा देते हैं, अक्सर SIS के साथ।
Dr. Patsama Vichinsartvichai, MD, MClinEmbryol, EFOG-EBCOG, EFRM-ESHRE/EBCOG, FACOG बोर्ड-प्रमाणित प्रजनन एंडोक्रिनोलॉजी एवं बांझपन विशेषज्ञ हैं। वे Navamindradhiraj University की Vajira आईवीएफ यूनिट के पूर्व प्रमुख और बैंकॉक में LIFE by Dr. Pat के संस्थापक हैं। उनका प्रकाशित शोध डिस्मॉर्फिक (T-आकार) गर्भाशय और गर्भाशय-संबंधी कारणों से होने वाले बांझपन पर केंद्रित है।
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